Tuesday, 1 September 2015

इस आज को अपनाए तो जाए

इल्म से निकली किताब मैं
आज पर लग गये हैं
हाँ सुखे फूलों की भीनी ख़ुशबू
नहीं है ज़रूर
पर महसूस ही 
असली परबाज़ है
आज शब्दों मैं पंख लगे है
चलो एक बहाना ही सही
इस आज को अपनाए तो जाए
                      -स्वरूप क मोहंती

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